शनि के शुभ फल (Saturn can give good results)

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शनि को पाप ग्रह (Saturn is a malefic planet) और नीच फल देने वाला कहा गय है.वास्तव में शनि के विषय में ऐसी धारणा अपूर्ण सत्य है.शनि का सत्य यह है कि ये दण्डाधिकारी हैं यह किसी स्थान में बैठकर अशुभ फल देते हैं तो कहीं स्थिति होकर धन, मान, सम्मान एवं सुखों की वर्षा करते हैं. आइये देखें शनि किन स्थितियों में सुखकारक होते हैं.

ज्योतिषशास्त्र में शनि के विषय में कहा गया है कि जिनकी कुण्डली में शनि द्वितीय (Saturn in the 2nd house) भाव में होते हैं शनि उनके लिए शुभ फलदायी (Saturn is lucky for them) होते हैं.इस भाव में शनि होने से व्यक्ति बहुत ही चालाक और अपने काम से मतलब रखने वाला होता है.शनि की यह स्थिति व्यक्ति को धनवान और आर्थिक रूप से परिपूर्ण बनाती है.इनके लिए आय के अनेक साधन और रास्ते खुलते रहते हैं.तीसरे भाव में शनि की युति सूर्य से (Conjunction of Saturn and Sun) होने पर बचपन में परेशानी रहती है परंतु युवावस्था में भाग्योदय होता है और परेशानियां धीरे धीरे कम होने लगती हैं.

केतु पाप ग्रह (Ketu is a malefic planet) है जिसे ज्योतिषशास्त्र में छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है.जब यह शनि के साथ युति सम्बन्ध बनाता (When in conjunction with Saturn) है तब शनि और केतु मिलकर शुभ फलदायक बन जाते हैं.जिनकी कुण्डली में यह युति होती है वह विद्वान और ज्ञानी होते हैं.गूढ विषयों जैसे दर्शनशास्त्र, अध्यात्म, ज्योतिषशास्त्र, मनोविज्ञान के क्षेत्रों से इनका सम्बन्ध होता है.जिनके जन्म के समय शनि वक्री होता है और कुण्डली में शनि का द्वितीय भाव से किसी प्रकार का सम्बन्ध होता है उन्हें गोचर में शनि धनवान बनाता है.

कुण्डली में शनि नवम भाव में हो अथवा किसी प्रकार से शनि का इस भाव से सम्बन्ध हो तो शनिदेव की कृपा से व्यक्ति उच्च पद प्राप्त करता है.न्याय एवं राजनीति के क्षेत्र में इन्हें विशेष सफलता मिलती है.नवम भाव मे शनि (Saturn in the ninth house) से प्रभावित व्यक्ति दिखावे से दूर रहता है एवं तार्किक विचारधारा वाला होता है.कुण्डली के दशम भाव में शनि हो तो धन प्रदान करता है परंतु इन्हें अभिमान से दूर रहना होता है.अभिमान और लापरवाही होने पर शनि जिस प्रकार धन देता है उसी प्रकार धनहीन बनाने का भी सामर्थ्य रखता है.

जिस व्यक्ति की कुण्डली में भाग्य भाव का स्वामी गुरू (The lord of fortune – Jupiter) हो और कर्म भाव का स्वामी शनि एवं दोनों एक दूसरे के घर में स्थित हों तो इस स्थिति में गुरू और शनि मिलकर व्यक्ति को सफलता, मान सम्मान, यश और धन दिलाते हैं.द्वादश भाव का शनि (Saturn in 12th house) धनवान बना दे तो इसका अभिमान नहीं करना चाहिए और संयम रखना चाहिए क्योकि शनि के कुपित होने पर धन का लोप भी बड़ी तेजी से होता है.एकादश भाव जिसे आय भाव भी कहा गया है इस भाव में शनि हों तो व्यक्ति यशस्वी एवं उच्चाधिकारी होता है.

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