गुरु वक्री:- 23 जुलाई 2018 कुम्भ में वापसी- Retrograde Jupiter re-enters Aquarius sign: 23rd July 2018

23 जुलाई 2018, 17:33 सांय काल में गुरु मार्गी से वक्री हो जायेगें. ऎसे में गुरु अपनी स्वराशि मीन राशि को छोड शनि की कुम्भ राशि की ओर प्रस्थान करेगें. गुरु की यह वक्री अवस्था 23 जुलाई 2018 से लेकर 1 नवम्बर 2018, दोपहर 12:58 तक रहेगी. लगभग 102 दिन का समय गुरु मार्गी होने में लेगें.

1. गुरु की शत्रु घर में वापसी (Jupiter Back to its Enemy House)

यह योग कुछ इस प्रकार का ही रहेगा. जैसे कोई कुछ दिनों के लिये अपना घर छोड कर शत्रु के घर में जाकर रहें. इस स्थिति में गुरु को असुविधा होने की पूर्ण संभावना रहेगी. पर गुरु-शनि का यह संबन्ध व्यक्ति की आन्तरीक शक्ति, व्यक्तिगत योग्यता को बढानें में सहायक रहेगा.

2. गुरु के कारकतत्वों में कमी (Reduction in the Karak Elements of Jupiter)

गुरु को जीवन साथी, संतान, धन, धर्म, आध्यात्म, विधा, विवेक, योग्यता, बडा भाई, सोना का कारक कहा गया है. गुरु की वक्रता इन सभी कारकतत्वों संबन्धी दिक्कतें दे सकती है. ऎसे में विवाह व शुभ कार्य संपन्न होने में कुछ बाधाएं आ सकती है. संतान के जन्म या संतान सम्बन्धी विषय व्यक्ति के कष्ट बढा सकते है. धार्मिक कार्यो के लिये समय संबन्धी परेशानी आ सकती है. तथा समय पडने पर विवेक का सहयोग न मिलने की भी सम्भावनाएं बनती है. कई बार व्यक्ति को अपनी योग्यता पर भी व्यक्ति को संदेह हो सकता है.

3. गुरु धातु सोने में विशेष उतार-चढाव:-

स्वर्ण के भावों में अचानक से उतार-चढाव आ सकते है. तथा बडे भाई के सहयोग में भी कमी हो सकती है. व्यक्ति के शरीर में गुरु लिवर, ह्र्दय कोश, पाचन-प्रक्रिया, कान आदि का कारक भी होता है. गुरु के नियन्त्रण में आने वाले शरीर के अंग रोग के प्रभाव में शीघ्र आ सकते है. ऎसे में इन अंगों का विशेष ध्यान रखना हितकारी रहेगा.

4. बीते समय से व्यक्ति का जुडना (The Person Goes Back to his past)

गुरु जब वक्री होते है तो व्यक्ति को बीते समय की समृ्तियां आने की संभावना बनती है. उसे पुराने रिश्तेदारों से मिलने के अवसर प्राप्त होने की भी संभावना बनती है. तथा इससे पूर्व ऋण पर दिये गये धन के वापस प्राप्ति में परेशानियां आ सकती है. इस अवस्था में व्यक्ति को स्वयं के प्रति भी ईमानदार रहना चाहिए. क्योकि ऎसे में व्यक्ति अपने बनाये सिद्धान्तों का स्वयं ही पालन नहीं करता है.

5. गुरु के कारकतत्वों में वृ्द्धि (Increase in Kaarak Elements of Jupiter)

कई बार यह गुरु व्यक्ति को पहले से अधिक धार्मिक आस्थावान बना सकता है. ऎसे में व्यक्ति का धार्मिक विषयों से जुडा व्यापार आरम्भ करना या इससे संबन्धित योजनाओं को पूरा करना व्यक्ति के लिये लाभकारी सिद्ध हो सकता है. तथा वक्री अवस्था में गुरु व्यक्ति को जीवन में आगे बढने के नये अवसर भी दे सकता है. इस अवधि में यह शैक्षिक जीवन में बाधाएं देने के साथ-साथ सफलता दिलाने में भी सहयोग करता है. वक्री अवस्था में जब गुरु अंशों में कम हो रहे होते है. तो इनसे प्राप्त होने वाले कारकतत्वों में कमी होती है. स्थिति इसके विपरीत होने पर फल भी इसके विपरित ही प्राप्त होते है.

6. गुरु के अशुभ फल की शान्ति (Remedy for Inauspicious Influence of Jupiter)

गुरु के वक्री होने के कारण गुरु की शुभता की कमी को दूर करने के लिये व्यक्ति को अपने से बडों को भोजन करान चाहिए, गुरुवार में पडने वाली अमावस्या या गुरुवार के व्रत रखना, पुखराज धारण करना, पीले वस्त्र, चने की दाल, शक्कर, केले, लड्डओं का भोग लगाना, धार्मिक ग्रन्थों का दान यथाशक्ति करने से लाभ प्राप्त होते है. गुरु मंत्र या गुरु गायत्री मंत्र का जाप 19000 बार विधिपूर्वक करना भी व्यक्ति को लाभ देता है. प्रत्येक ग्रुरुवार को केसर का तिलक लगाना से भी गुरु की शुभता में वृ्द्धि होती है.

गुरु बीज मंत्र:- ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम: गुरु गायत्री मंत्र:- ऊँ अंगिरो जाताय विदमहे वाचस्पते धीमहि तन्नो ग्रुरु: प्रचोदयात

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