गोचर में राहु का फल (The Results For Rahu's Transit Through 12 Signs)



आकाशीय ग्रहों में राहु केतु का अस्तित्व भले ही नहीं हो परंतु ज्योतिषशास्त्र में अन्य ग्रहों की तरह इसे भी प्रमुखता दी गई है। राहु केतु आभासीय ग्रह (Rahu and Ketu are non-physical planets) हैं जो किसी भी व्यक्ति की जन्म पत्रिका में बैठकर भावानुसार फल प्रदान करते हैं। जन्म समय में गोचर में राहु की स्थिति का व्यक्ति पर काफी प्रभाव पड़ता है (Rahu's transit has a strong impact on a person)।

राहु केतु के विषय में ऐसी मान्यता है कि जब जन्मकुण्डली में राहु केतु किसी ग्रह के साथ होते हैं तब अपना प्रभाव न देकर साथ वाले ग्रह का प्रभाव देते हैं (Rahu and Ketu give the result of the planets placed with them)। राहु चन्द्र राशि से तीसरे भाव, छठे एवं ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है लेकिन पंचम, नवम एवं द्वादश भाव में अगर कोई अन्य ग्रह है तो राहु को वेध लग जाता है और शुभ फल नहीं मिल पाता है। जन्मकालीन चन्द्र राशि से प्रत्येक भाव में गोचर के समय राहु अलग फल देता है जिसके अनुसार:

राहु गोचर प्रथम भाव: (Rahu's Transit Through First House)
जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था उस राशि में जब राहु पहुंचता है तब व्यक्ति को रोग और व्याधियां घेरती हैं (A native is plagued with disease when Rahu transits through the Moon's Rashi at birth)। इस समय व्यक्ति को नाना प्रकार का शारीरिक कष्ट महसूस होता है। व्यक्ति सोचता कुछ है और होता कुछ है यानी सब कुछ उल्टा पुल्टा होता रहता है जिससे मानसिक परेशानियां महससू होती है। शरीर थका थका और आलस्य छाया रहता है जिसका परिणाम होता है कार्य कुशलता में कमी।

राहु गोचर द्वितीय भाव: (Rahu's Transit Through Second House)
जन्म राशि से जब राहु गोचर करता है तब यह धन की हानि करता है (Rahu gives financial loss when in the second house from the Moon sign)। इस गोचर में अनावश्यक रूप से आपका धन खर्च होता है और आपको आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ता है। अपने परिवार और सगे सम्बन्धियों को इस राशि के कारण कष्ट होता है जिससे आपकी परेशानी भी बढ़ती है। राहु का यह गोचर कुटुम्बीजनों से विवाद का कारण भी बन सकता है। ग़लत दिशा में ले जाकर यह आपको नशीले पदर्थों के सेवन हेतु प्रोत्साहित कर सकता है। राहु का यह गोचर मानसिक तौर पर आपको अशांत बना सकता है।

राहु गोचर तृतीय भाव: (Rahu's Transit Through The Third House)
चन्द्र राशि से तृतीय भाव का राहु शुभ फलदायी होता है (Rahu's transit in the third sign from Moon gives you political rise)। इस भाव में राहु के गोचर करने से आप कुटनीति एवं राजनीतिक बुद्धि लगाकर अपना काम निकालने की प्रवृति रखते हैं। आप मे गुप्त रूप से कार्य करने की प्रवृति जन्म लेती है। आप गुप्त रूप से किसी योजना पर कार्य करते हैं और अपनी योजना का खुलासा तभी करते हैं जबकि काम पूरा हो जाता है। राहु का यह गोचर आपकी सुख सुविधाओं में इज़ाफा करता है।

राहु गोचर चतुर्थ भाव: (Rahu's Transit Through The Fourth House)
जन्म राशि से चतुर्थ भाव में राहु का जब गोचर होता है तब यह व्यक्ति को कई प्रकार से परेशानी एवं कष्ट पहुंचाता है (Rahu's transit through the fourth house is malefic)। राहु का यह गोचर माता को कष्ट देता है। जीवन में हर कदम पर अवरोध और बाधाओं से व्यक्ति परेशान रहता है। मान सम्मान की हानि और अपमान का भय रहता है। तकलीफ और परेशानी हर ओर एक के बाद एक आती रहती है। भूमि एवं वाहन सम्बन्धी मामले उलझते हैं या इनको लेकर कोई परेशानी खड़ी होती है।

राहु गोचर पंचम भाव: (Rahu's Transit Through The Fifth House)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्म राशि से पंचम भाव में राहु का गोचर व्यक्ति को कष्ट और दु:ख देता है। व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित हो जाती है और रातों रात अमीर बनने का सपना बुनने लगता है। अमीर बनने की कोशिश में जो भी हाथ में होता वह भी चला जाता है जिससे आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाती है। इस भाव में राहु का गोचर स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डालता है व्यक्ति मुंह और दांतों में तकलीफ से परेशान होता है। इस समय कई प्रकार उलझनें आती रहती हैं और चुनौतियों का सामना करना होता है।

राहु गोचर षष्टम भाव: (Rahu's Transit Through The Sixth House)
जन्मकालिक चन्द्र से जब षष्टम भाव में राहु का गोचर होता है तब व्यक्ति के लिए राहु का गोचर सामान्य रूप से हानिप्रद नहीं होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इस राहु का प्रभाव कुछ विपरीत होता है इसलिए खान पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रहती है। पेट सम्बन्धी रोग से व्यक्ति पीड़ित होता है। आर्थिक दृष्टि से राहु का यह गोचर शुभकारी रहता है, इस समय व्यक्ति को धन का लाभ होता है। यदा कदा आकस्मिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।

राहु गोचर सप्तम भाव: (Rahu's transit through the seventh house)
जन्म कालिक चन्द्र से सप्तम भाव में राहु का गोचर दाम्पत्य जीवन के लिए कष्टकारी होता है (Rahu is malefic when in the seventh house from Rahu)। इस राहु के कारण पति पत्नी के बीच सामंजस्य में कमी आती है और दूरियां बढ़ती है। राहु के इस भाव में गोचर काल में जीवन साथी को कष्ट और परेशानियों का सामना करना होता है। व्यक्ति स्वास्थ्य को लेकर दु:खी व पीड़ित रहता है। इस समय बुद्धि भी साथ नहीं देती है और मानसिक परेशानियां चारों तरफ से घेरे रहती हैं।

राहु गोचर अष्टम भाव: (Rahu's Transit Through The Eighth House)
आपकी कुण्डली में जब जन्मकालिक चन्द्र से गोचर में राहु जब अष्टमभाव में होता है (Rahu in eighth house from the Moonsign yields physical problems) तब यह अशुभ प्रभाव देता है। राहु के इस गोचर के समय शारीरिक कष्ट बढ़ता है, विभिन्न प्रकार के रोग से आप परेशान होते हैं, विशेष तौर पर मूत्र मार्ग एवं मलद्वार में रोग होने की संभावना रहती है। आर्थिक दृष्टि से भी यह राहु अशुभकारी माना जाता है क्योंकि यह अनावश्यक रूप से धन खर्च करवाता है और आर्थिक नुकसान पहुंचाता है।

राहु का गोचर नवम भाव: (Rahu's Transit Through The Ninth House)
कुण्डली में जब राहु जन्मकालिक चन्द्र से नवम भाव में गोचर करता है तब यह आपके कार्यों में बार बार अवरोध पैदा करता है (Rahu in ninth house from the Moonsign raises many obstacles)। आपको अपने उद्देश्य की पूर्ति में राहु कदम कदम पर रूकावट डालता है। कई बार जब आपको लगता है कि आपका कोई काम बनने वाला है तब अचानक कोई ऐसी खड़ी हो जाती है जिससे आपका काम बनते बनते रह जाता है। धन के मामले में भी राहु का यह गोचर विपरीत प्रभाव डालता है यह आपसे अनावश्यक खर्च करवाता है जिससे आपको आर्थिक तंगी का सामना करना होता है।

राहु गोचर दशम भाव: (Rahu's Transit Through The Tenth House)
जन्मकालिक चन्द्र से जब राहु दशम भाव में गोचर करता है तब यह व्यक्ति के जीवन में उलट पुलट कर देता है (Rahu in tenth house from the Moonsign causes a lot of upheavel)। राहु का यह गोचर स्थानान्तरण करवाता है। आपको अपना घर छोड़कर कहीं और जाना होता है अथवा नौकरी में तबादला होता है। इस गोचर में आपका कार्य परिवर्तित होता है यानी आप जिस काम में हैं उस काम को छोड़कर किसी अन्य काम में संलग्न हो सकते हैं। इस गोचर में आर्थिक परेशानी से भी दो चार होना पड़ता है। अनावश्यक परिश्रम से व्यक्ति अपने शरीर में थकान महसूस करता है।

राहु गोचर एकादश भाव: (Rahu's Transit Through the Eleventh House)
जन्म राशि से एकादश भाव में जब राहु गोचर करता है तब यह शुभ फलदायी होता है। राहु का अशुभ प्रभाव इस भाव में नहीं होता है। गोचर में यह राहु व्यक्ति को मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा दिलाता है। व्यक्ति के लिए आय के नए साधन बनते हैं एवं पुराने माध्यमों से भी धन का आगमन होता रहता है। यह गोचर धन की दृष्टि से अनुकूल परिणाम देने वाला है। व्यक्ति को अपने कार्य में सफलता हासिल होती है। अगर आपकी कुण्डली में भी जन्मकालिक चन्द्र से राहु ग्यारह भाव में गोचर कर रहा है तो समझ लीजिए आपका अच्छा समय चल रहा है।

राहु गोचर द्वादश भाव: (Rahu's Transit Through The Twelfth House)
द्वादश भाव में जन्मकालिक चन्द्र से राहु का गोचर व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा देता है। राहु गोचर में जब 12वें भाव में आता है तब व्यक्ति बड़े बड़े सपने देखने लगता है और ख्यालों की दुनियां में खोया रहता है। इन हवाई किलों का कोई अंजाम नहीं होता है व्यक्ति की योजनाएं और कल्पनाएं धरी की धरी रह जाती है। आर्थिक दृष्टि से व्यक्ति को तंग हालात से गुजरना होता है क्योंकि इस गोचर में अनावश्यक खर्च होता रहता है।

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