प्रश्न कुण्डली (Prashna Kundali)



किसी भी व्यक्ति की जन्मकुण्डली बनाने के लिए जन्म तिथि, जन्म समय एवं जन्म स्थान की आवश्यकता होती है. संसार में एसे बहुत से व्यक्ति जिन्हे अपनी जन्म तिथि या समय सही सही मालूम नही होता.

प्रकृ्ति के नियम के अनुसार सुख दुख प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अवश्य आता है. क्योकि इनकी जन्मकुण्डली का निर्माण नही हो सकता अतः एसे व्यक्तियो की समस्या का समाधान प्रश्नकुण्डली (Prashna Kundali) के माध्यम से किया जाता है. सैद्वान्तिक रुप से प्रश्न कुण्डली भी वर्तमान समय (जिस समय पर प्रश्न पूछा जाता है) की जन्मकुण्डली ही होती है. इसके निर्माण में वैदिक ज्योतिष के नियम ही लागू होते है.
प्रश्न कुण्डली में फलादेश कथन दो प्रकार से किया जाता है.


1) गणितीय सिद्धान्तो व नियमो द्वारा (Ganit Sidhanta)
2) अन्तदृ्ष्टि (Intuition) द्वारा


गणित के सिद्धान्त द्वारा फलकथन (Phala Kathan) का नियम वैदिक ज्योतिष के जानकार कोइ भी विद्वान कर सकते हैं. इसमें ज्योतिर्वेद प्रश्न कर्ता से ही उसकी समस्या के सम्बन्ध में प्रश्न करते हैं तथा ग्रहो की स्थिति के अनुसार उस समस्या का समाधान बताते हैं.

परन्तु अंतर्ज्ञान/ अन्तर्दृष्टि (Intuition) द्वारा ज्योतिर्वेद स्वंय ही प्रश्नकर्ता (Prashna Karta) से बिना पूछे उसकी समस्या बताकर उसका समाधान करते हैं. इसके लिए ज्योतिष से श्रेष्ठ (आगे) आध्यात्मिक शक्ति या सिद्धि की आवश्यकता होती है, जोकि सामान्य ज्योतिषी के बस के बाहर होती हे. 'सिद्धि' प्राप्त करने के लिए सत्य, पवित्रता व साधना जरुरी है.

प्रश्नकुण्डली (Prashna Kundali) की सबसे बडी कमजोरी यह है कि यह केवल वर्तमान के आसपास (थोडा पहले व थोडा बाद) की समस्या को ही बतलाती है. अधिक समय (कई वर्षों) की जानकारी इससे प्राप्त नहीं होती. फिर भी वर्तमान समय की समस्या का समाधान करने में यह विद्या काफी हद तक सही है.

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