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Bhadrapada Sankranti – भाद्रपद संक्रान्ति 2010

17 अगस्त 2010, मंगलवार, प्रात: 05:43, सूर्य मघा नक्षत्र, सिंह राशि में प्रवेश करेगा. इस संक्रान्ति में किये जाने वाले कार्यो का शुभ समय दोपहर 11:58 तक रहेगा. भाद्रपद संक्रान्ति को ध्वांक्षी संक्रान्ति के नाम से भी जाना जाता है. भाद्रपद संक्रान्ति व्यापारिक वर्ग के लिये विशेष रहेगी. इस संक्रान्ति में व्यापारिक वर्ग को लाभ व सुख दोनों की प्राप्ति होने की संभावनाएं रहेगी.

भाद्रपद माह का महत्व इस माह में आने वाले शुभ महोत्सवों के कारण सदैव से विशेष रहा है:-

Kajari Teej – Kajjali Teej कज्जली तीज:- 27 अगस्त 2010
भाद्रपद कृष्ण तृ्तीय तीथि (इस वर्ष इस तिथि का क्षय रहेगा.) अर्थात 27 अगस्त 2010, शुक्रवार, उतरभाद्रपद नक्षत्र, चन्द्र मीन राशि में, भद्रा 16:31 तक रहेगी. 27 अगस्त 2010 में बड़ी तीज का पर्व मनाया जाता है. इस तीज को कज्जली तीज के नाम से भी जाना जाता है. इस त्यौहार को राजस्थान के कई क्षेत्रों में विशेष रुप से मनाया जाता है.

यह माना जाता है कि इस पर्व का आरम्भ महाराणा राजसिंह ने अपनी रानी को प्रसन्न करने के लिये आरम्भ किया था. यह त्यौहार दो माह में मनाया जाता है. श्रवण मास कि शुक्ल पक्ष की तृ्तीया को छोटी तीज व भाद्रपद की तृ्तीया को बडी तीज अर्थात कज्जली तीज का पर्व मनाया जाता है.

Shree Krishna Janmashtami – श्रीकृ्ष्ण जन्माष्टमी:- 1 सितम्बर 2010
भाद्रपद मास में आने वाला अगला पर्व कृष्ण अष्टमी के नाम से जाना जाता है. यह उपवास पर्व उतरी भारत में विशेष महत्व रखता है. श्री कृ्ष्ण जन्माष्टमी प्रात: 10:50 से अगले दिन प्रात: 10:42 तक रहेगी. इस अवधि में कृ्ष्ण पूजा, कीर्तन, उपवास व मंदिरों में धूमधाम का माहौल रहेगा.

Vatsa Dwadashi – वत्सद्वादशी पर्व:- 05 सितम्बर, 2010
वर्तमान में यह पर्व मात्र राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में ही देखने में आता है. समय की धूल ने इस पर्व के उल्लास को ढक दिया है. यह पर्व भाद्रपद माह, कृ्ष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है. वत्सद्वाद्शी में परिवार की महिलाएं गाय व बछडे का पूजन करती है. इसके पश्चात माताएं गऊ व गाय के बच्चे की पूजा करने के बाद अपने बच्चों को प्रसाद के रुप में सूखा नारियल देती है. यह पर्व विशेष रुप से माता का अपने बच्चों कि सुख-शान्ति से जुडा हुआ है.

Ganesh Chaturthi – गणेश चतुर्थी / सिद्धि विनायक व्रत :- 11 सितम्बर 2010
भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, की चतुर्थ तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. इस वर्ष यह 11 सितम्बर 2010 को मनाया जायेगा. इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा, उपवास व आराधना का शुभ कार्य किया जाता है. पूरे दिन उपवास रख श्री गणेश को लड्डूओं का भोग लगाया जाता है. प्राचीन काल में इस दिन लड्डूओं की वर्षा की जाती थी, जिसे लोग प्रसाद के रुप में लूट कर खाया जाता था. गणेश मंदिरों में इस दिन विशेष धूमधाम रहती है.

गणेश चतुर्थी को चन्द्र दर्शन नहीं करने चाहिए. विशेष कर इस दिन उपवास रखने वाले उपासकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए. अन्यथा उपवास का पुन्य प्राप्त नहीं होता है.

Dev Jhoolni Ekadashi – देवझूलनी एकादशी:- 18 सितम्बर 2010
देवझूलनी एकादशी को पदमा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, एकादशी तिथि, शनिवार, उतरा आषाढा नक्षत्र में यह उत्सव मनाया जाता है. देवझूलनी एकादशी में विष्णु जी की पूजा, व्रत, उपासना करने का विधान है.

इस दिन विष्णु देव की पाषाण की प्रतिमा अथवा चित्र को पालकी में ले जाकर जलाशय से स्थान करना शुभ माना जाता है. इस उत्सव में नगर के निवासि विष्णु गान करते हुए पालकी के पीछे चल रहे होते है. उत्सव में भाग लेने वाले सभी लोग इस दिन उपवास रखते है.

Anant Chaturdashi –  अनन्त चतुर्थेदशी :- 22 सितम्बर 2010
भाद्रपद माह में आने वाले पर्वों की श्रंखला में अगला पर्व अनन्त चतुर्दशी के नाम से प्रसिद्ध है. 22 सितम्बर 2010, चतुर्दशी तिथि, शुक्ल पक्ष, बुधवार, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में यह उपवास पर्व इस वर्ष मनाया जायेगा. इस पर्व में दिन में एक बार भोजन किया जाता है.

यह पर्व भगवान विष्णु के अनन्त स्वरुप पर आधारित है. इस दिन “ऊँ अनन्ताय नम:’ का जाप करने से विष्णु जी प्रसन्न होते है.

1 Comment

  • At 2011.05.14 03:15, Wiseman said:

    Wow! Great tihnnkig! JK

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