“Author Archive”

ज्योतिष में ग्रहों और राशियों की शक्ति ( The Power of Planets and Signs in Astrology)

ज्योतिष में  ग्रहों और राशियों  की शक्ति ( The Power of Planets and Signs in Astrology)

ज्योतिषशास्त्र के आधार ग्रह और राशि हैं. इन्हीं की स्थितियों के आधार पर व्यक्ति विशेष के जीवन में उतार-चढ़ाव तथा यश-अपयश व सुख-दुख का विचार किया जाता है. यह सभी विषय व्यक्ति को उनकी कुण्डली में स्थिति ग्रह और राशियों की शक्ति के अनुरूप कम व ज्यादा मिलता है. इनके बीच शक्ति का आंकलन ज्योतिषशास्त्र के विशेष नियमों के आधार पर किया गया है. महर्षि जैमिनी ने अपने ज्योतिष में ग्रह व राशियों के बल को मापने के 7 आधार बताए हैं.

June 2 2010 | Posted in Jaimini Jyotish | Read More »

रत्नों का चुनाव कीजिए लाल किताब के अनुसार ( Select Gemstones As per Lal Kitab)

रत्नों का  चुनाव कीजिए लाल  किताब के अनुसार ( Select Gemstones As per Lal Kitab)

रत्नों में ग्रहों की उर्जा को अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता होती है। रत्नों में विराजमान अलौकि गुणों के कारण रत्नों को ग्रहों का अंश भी माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र की सभी शाखाओं में रत्नों के महत्व का वर्णन मिलता है। लाल किताब भी इससे मुक्त नहीं है। (Lal kitab details how gemstones can be […]

May 28 2010 | Posted in Lal kitab | Read More »

कुम्भ राशि में गुरू के गोचर का वृष राशि पर प्रभाव (Impact of Jupiter’s Transit Into Aquarius on Taurus Sign)

कुम्भ राशि में गुरू के गोचर का वृष राशि पर प्रभाव (Impact of Jupiter’s Transit Into Aquarius on Taurus Sign)

20 दिसम्बर को गुरू राशि परिवर्तन करके कुम्भ राशि में प्रवेश कर रहा है. इस राशि में इसका गोचर 1 मई तक रहेगा. इस दौरान गुरू की रजत स्थिति रहेगी तथा यह कृतिका नक्षत्र के दूसरे, तीसरे तथा चौथे पद तथा रोहिणी नक्षत्र के चारों पदों में एवं मृगशिरा नक्षत्र के पहले व दूसरे चरण में भ्रमण करेगा. इसका प्रभाव आपको जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है

December 18 2009 | Posted in Vedic Astrology | Read More »

कुम्भ राशि में गुरू के गोचर का मेष राशि पर प्रभाव (Impact of Jupiter’s Transit Into Aquarius on Aries Sign)

कुम्भ राशि में गुरू के गोचर का मेष राशि पर प्रभाव (Impact of Jupiter’s Transit Into Aquarius on Aries Sign)

गुरू को नवग्रहों में शुभ ग्रह के रूप में जाना जाता है. यह धर्म और अध्यात्म का प्रतिनिधित्व करता है. विवाह, संतान की प्राप्ति, शिक्षा एवं ज्ञान के साथ ही साथ शुभता एवं खुशहाली के लिए भी गुरू की स्थिति से विचार किया जाता है. यही कारण है कि गुरू के राशि परिवर्तन को आशा की भरी दृष्टि से देखते हैं. वर्ष 2009 के अंतिम महीने यानी दिसम्बर में गुरू 20 तारीख को मकर राशि से निकल कर कुम्भ राशि में गोचर कर रहा है. इस गोचर से सभी राशि वाले व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रभावित होंगे. आपकी राशि पर गुरू का यह गोचर क्या प्रभाव डालता है .

December 17 2009 | Posted in Vedic Astrology | Read More »

कौन सा रत्न कब पहनना चाहिए – (Which Gemstone to wear and when?)

कौन सा रत्न कब पहनना चाहिए – (Which Gemstone to wear and when?)

रत्न दोधारी तलवार की तरह होते हैं जिन्हें उचित जांच परख के बाद ही पहनना चाहिए अन्यथा सकारात्मक की जगह नकारात्मक परिणाम भी देते हैं.रत्न धारण करने से पहले ग्रहो की स्थिति, भाव एवं दशा का ज्ञान जरूरी होता है.किसी रत्न के साथ दूसरे रत्न का क्या परिणाम होता है यह भी जानना आवश्यक होता […]

December 14 2009 | Posted in Gemstone | Read More »

चौघडिया – Chogadhia The instant Muhurta

चौघडिया – Chogadhia The instant Muhurta

तेजी से भागते, बदलते समय ने ज्योतिष के मूहुर्त को भी बदल के रख दिया है. आज झटपट मूहुर्त का चलन है. मूहुर्तों की इसी श्रेणी में चौघडिया मूहुर्त (Chaughadia muhurtas) का नाम आता है. इस मूहुर्त को गुजरात व भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक प्रयोग में लाया जाता है. इसका प्रयोग किसी शुभ काम को या किसी नई योजना को शुरु करने के लिये किया जाता है. जैसे: नये व्यापार या व्यवसाय को आरम्भ करने के लिये चौघडिया मूहुर्त का प्रयोग किया जा सकता है. हमारे यहां अनेक प्रकार के मूहुर्त निकाले जाते है. उद्देश्य के अनुसार उन्हे ज्ञात किया जाता है.

December 4 2009 | Posted in Feature, Muhurta | Read More »

शनि नौकरी एवं कारोबार (Saturn’s Influence on Profession and Business)

शनि नौकरी एवं कारोबार (Saturn’s Influence on Profession and Business)

शनि देव कर्म के स्वामी हैं (Saturn is the lord of Karma). जिनकी कुण्डली में शनि देव की शुभ स्थिति होती है उनका करियर ग्राफ निरन्तर आगे बढ़ता रहता है . ग्रह की स्थिति जिनकी कुण्डली में अशुभ होती है उन्हें कारोबार एवं रोजी रोजगार में अनेकों तरह की परेशानियों से दो चार होना पड़ता है. कुण्डली में इनकी उपस्थित एवं शुभ अशुभ के आधार पर व्यक्ति के करियर एवं रोजी रोजगार के विषय में संकेत प्राप्त किया जा सकता है.

December 2 2009 | Posted in Saturn | Read More »

शनि और पाप ग्रह (Shani and Malefic Planets)

शनि और पाप ग्रह (Shani and Malefic Planets)

नवग्रहों में शनि स्वयं पाप ग्रह है.जब शनि अन्य पाप ग्रहों के साथ होता है तब यह किस प्रकार का फल देता है यह उत्सुकता का विषय है.क्या शनि का पाप प्रभाव और बढ़ जाता है या शनि शुभ प्रभाव देता है.विभिन्न भावों में पाप ग्रहों से युति बनाकर शनि किस प्रकार का फल देता है.यहां इन बातों पर हम बात कर रहे हैं.

December 2 2009 | Posted in Saturn | Read More »

शनि लाल किताब में (Shani Remedies and phaladesh according to Lal Kitab)

शनि लाल किताब में (Shani Remedies and phaladesh according to Lal Kitab)

शनि को मंद गति से चलने वाला क्रूर ग्रह माना जाता है. शनि नीच कर्म का और परिश्रम का स्वामी होता है.लाल किताब (Lalkitab) शनि को कर्मों के अनुसार पाप पुण्य का लेखा जोखा करने वाला ग्रह मानता है.टेवे में अलग अलग खाने में स्थित होकर शनि शुभ और मंदा फल देता है.लाल किताब (Lalkitab) शनि के विषय और क्या कहता है ?

December 1 2009 | Posted in Lal kitab | Read More »

शनि का गोचर (Saturn’s transit)

शनि का गोचर (Saturn’s transit)

नवग्रहों में शनि को सर्वाधिक शक्तिशाली ग्रह के रूप में जाना जाता है.शनि भाग्य का निर्माता है तो भाग्य को अभाग्य में बदलने की क्षमता भी रखता है.शनि को ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है.आइये देखें कि शनि देव गोचर (Transit of Shani) में किस प्रकार से फल प्रदान करते हैं. ज्योतिष विधा के अनुसार शनिदेव जब गोचर में चन्द्र राशि से द्वादश भाव में आते हैं एवं द्वितीय भाव की राशि में रहते हैं तो साढ़े साती की अवधि कहलाती है

December 1 2009 | Posted in Saturn | Read More »