मंगल को नवग्रहों में तीसरा स्थान प्राप्त है और केतु को नवम स्थान फिर भी ज्योतिष की पुस्तकों में कई स्थान पर लिखा मिलता है कि मंगल एवं केतु समान फल देने वाले ग्रह हैं (It is said in many jyotish books that Mars and Ketu give similar results)...


29 Aug 2010 0 comments Read More

हमारा जीवन चक्र ग्रहों की गति और चाल पर निर्भर करता है. ज्योतिष शास्त्र इन्हीं ग्रहों के माध्य से जीवन की स्थितियों का आंकलन करता है और भविष्य फल बताता है. ज्योतिष गणना में योग का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. कुछ योग शुभ स्थिति बताते हैं तो कु...


28 Dec 2009 0 comments Read More

20 दिसम्बर को गुरू राशि परिवर्तन करके कुम्भ राशि में प्रवेश कर रहा है. इस राशि में इसका गोचर 1 मई तक रहेगा. इस दौरान गुरू की रजत स्थिति रहेगी तथा यह कृतिका नक्षत्र के दूसरे, तीसरे तथा चौथे पद तथा रोहिणी नक्षत्र के चारों पदों में एवं मृगशिरा...


18 Dec 2009 0 comments Read More

गुरू को नवग्रहों में शुभ ग्रह के रूप में जाना जाता है. यह धर्म और अध्यात्म का प्रतिनिधित्व करता है. विवाह, संतान की प्राप्ति, शिक्षा एवं ज्ञान के साथ ही साथ शुभता एवं खुशहाली के लिए भी गुरू की स्थिति से विचार किया जाता है. यही कारण है कि गु...


17 Dec 2009 0 comments Read More

कुण्डली में फलादेश (future prediction from birth chart) करते समय सटीक फलादेश के लिए महादशा (major period) और अन्तर्दशा (sub-period) के साथ ग्रहों के गोचर (Transition of planet) पर दृष्टि रखना आवश्यक होता है .ऐसा इसलिए होता है कि महादशा और अ...


28 Nov 2009 0 comments Read More

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस लग्न में व्यक्ति का जन्म होता है.उससे विभिन्न राशियों के अनुसार साझेदारी का फल मिलता है.अगर आप किसी से साझेदारी या दोस्ती करने जा रहे हैं तो यह देखिये कि क्या आपकी राशि से उस व्यक्ति की राशि में तालमेल बैठ रहा ह...


28 Nov 2009 0 comments Read More

हम जैसा कर्म करते हैं उसी के अनुरूप हमें ईश्वर सुख दु:ख देता है। सुख दु:ख का निर्घारण ईश्वर कुण्डली में ग्रहों स्थिति के आधार पर करता है। जिस व्यक्ति का जन्म शुभ समय में होता है उसे जीवन में अच्छे फल मिलते हैं और जिनका अशुभ समय में उसे कटु ...


28 Nov 2009 0 comments Read More