नवग्रहों में शनि स्वयं पाप ग्रह है.जब शनि अन्य पाप ग्रहों के साथ होता है तब यह किस प्रकार का फल देता है यह उत्सुकता का विषय है.क्या शनि का पाप प्रभाव और बढ़ जाता है या शनि शुभ प्रभाव देता है.विभिन्न भावों में पाप ग्रहों से युति बनाकर शनि कि...


02 Dec 2009 0 comments Read More

शनि देव कर्म के स्वामी हैं (Saturn is the lord of Karma). जिनकी कुण्डली में शनि देव की शुभ स्थिति होती है उनका करियर ग्राफ निरन्तर आगे बढ़ता रहता है . ग्रह की स्थिति जिनकी कुण्डली में अशुभ होती है उन्हें कारोबार एवं रोजी रोजगार में अनेकों त...


02 Dec 2009 0 comments Read More

नवग्रहों में शनि को सर्वाधिक शक्तिशाली ग्रह के रूप में जाना जाता है.शनि भाग्य का निर्माता है तो भाग्य को अभाग्य में बदलने की क्षमता भी रखता है.शनि को ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है.आइये देखें कि शनि देव गोचर (Transit...


01 Dec 2009 0 comments Read More

जैसे कुछ ग्रहों के साथ शनि देव शुभ होते हैं और कुछ के साथ अशुभ फलदायी, उसी प्रकार कुछ 12 राशियों में से कुछ में शनि लाभदायक तो कुछ में हानिकारक होते हैं.आपकी कुण्डली में शनि किस राशि में हैं और यह आपको किस प्रकार से प्रभावित करेंगे आइये इसे...


30 Nov 2009 0 comments Read More

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार साढ़े साती तब बनती है जब शनि गोचर में जन्म चन्द्र से प्रथम, द्वितीय और द्वादश भाव से गुजरता है। शनि एक राशि से गुजरने में ढ़ाई वर्ष का समय लेता है इस तरह तीन राशियों से गुजरते हुए यह साढ़े सात वर्ष का समय लेता है जो...


29 Nov 2009 0 comments Read More

ज्योतिषशास्त्र में शनि के विषय में कहा गया है कि जिनकी कुण्डली में शनि द्वितीय (Saturn in the 2nd house) भाव में होते हैं शनि उनके लिए शुभ फलदायी (Saturn is lucky for them) होते हैं.इस भाव में शनि होने से व्यक्ति बहुत ही चालाक और अपने काम स...


28 Nov 2009 0 comments Read More