मंगल को नवग्रहों में तीसरा स्थान प्राप्त है और केतु को नवम स्थान फिर भी ज्योतिष की पुस्तकों में कई स्थान पर लिखा मिलता है कि मंगल एवं केतु समान फल देने वाले ग्रह हैं (It is said in many jyotish books that Mars and Ketu give similar results)...


29 Aug 2010 0 comments Read More

गुरू को सत्वगुणी ग्रह माना जाता है. यह ज्ञान व भाग्य का प्राकृति स्वामी ग्रह माना जाता है. ज्योतिषशास्त्र में इसे धन का कारक भी कहा गया है. आजीविका का सम्बन्ध धन व आय से होता है. इस लिहाज से गुरू का सम्बन्ध आजीविका स्थान यानी दसवें घर से हो...


04 Jun 2010 2 comments Read More

देवी लक्ष्मी की कृपा हम सभी प्राप्त करना चाहते हैं क्योंकि देवी लक्ष्मी ही सुख वैभव को देने वाली है.ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि में धन वैभव और सुख के लिए कुण्डली में मौजूद धनदायक योग (Lakshmi Yoga) काफी महत्वपूर्ण होते है. देखिये कि आपकी कुण्...


30 Nov 2009 0 comments Read More

जैसे कुछ ग्रहों के साथ शनि देव शुभ होते हैं और कुछ के साथ अशुभ फलदायी, उसी प्रकार कुछ 12 राशियों में से कुछ में शनि लाभदायक तो कुछ में हानिकारक होते हैं.आपकी कुण्डली में शनि किस राशि में हैं और यह आपको किस प्रकार से प्रभावित करेंगे आइये इसे...


30 Nov 2009 0 comments Read More

गणित का नियम है ऋणात्मक ऋणात्मक मिलकर धनात्मक हो जाता हैं. इसी प्रकार का नियम ज्योतिषशास्त्र में भी है. ज्योतिषशास्त्र में जब दो अशुभ भावों एवं उनके स्वामियों के बीच सम्बन्ध बनता है तो अशुभता शुभता में बदल जाती है. विपरीत राजयोग (Vipreet Ra...


28 Nov 2009 0 comments Read More

जैमिनी ज्योतिष (Jaimini Jyotish) में आत्मकारक ग्रह नवमांश कुण्डली में जिस राशि में होता है वह कारकांश राशि (Karkamsha Rashi) कहलाती है. कारकांश राशि को लग्न माना जाता है और अन्य ग्रहों की स्थिति जन्म कुण्डली की तरह होने पर जो कुण्डली तैयार ...


28 Nov 2009 0 comments Read More

व्यवसाय का सम्बन्ध जीविका से है. जीविका के लिए व्यक्ति व्यापार करता है या नौकरी. इसका स्तर छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी. इसमें पदोन्नति भी होती है और स्थानांतरण भी. प्रश्न कुण्डली रोजगार और व्यवसाय से सम्बन्धित सभी पहलूओं का उत्तर देने में...


28 Nov 2009 0 comments Read More

मंगल को लाल किताब (Lal kitab) में शेर कहा गया है। यह अगर नेक हो तो वीरता, साहस और पराक्रम देता है। अगर मंदा हो तो भाई बंधुओं से परेशानी होती है। विवादो में उलझना पड़ता है। लाल किताब कहता है मंगल अगर मंदा (debilitated Mars) हो तो इसे नेक बना...


28 Nov 2009 0 comments Read More

मुहूर्त (muhurat) वैदिक ज्योतिष (Vedic astrology) का महत्वपूर्ण अंग है। यह समय विशेष में कार्य की शुभता और अशुभता की जानकारी देता है। अगर आप अपने कार्य को सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो मुहूर्त में लग्न का विचार करके कार्य शुरू करें। तुला ...


28 Nov 2009 0 comments Read More

विवाह के समय शुभ लग्न (benefic ascendant) उसी प्रकार महत्व रखता है, जैसा जन्म कुण्डली (birth chart) में लग्न स्थान (ascendant) में शुभ ग्रहों की स्थिति का होता है.विवाह के लिए लग्न निकालाते समय वर वधु की कुण्डलियों का परीक्षण (examination o...


28 Nov 2009 0 comments Read More

मांगलिक दोष (Manglik Dosha) जिसे कुजा दोष (Kuja Dosha) भी कहते हैं विवाह के विषय में बहुत ही गंभीर और अमंगलकारी मानी जाती है. मांगलिक दोष से पीड़ित लड़का हो या लड़की दोनों की शादी को लेकर माता पिता की परेशानी विशेष रूप से बढ़ जाती है क्योंक...


28 Nov 2009 0 comments Read More

तेजी से भागते, बदलते समय ने ज्योतिष के मूहुर्त को भी बदल के रख दिया है. आज झटपट मूहुर्त का चलन है. मूहुर्तों की इसी श्रेणी में चौघडिया मूहुर्त (Chaughadia muhurtas) का नाम आता है. इस मूहुर्त को गुजरात व भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक प्...


04 Nov 2009 0 comments Read More